Eid ul zuha क्या है?Eid ul zuha क्यों मानाते है?

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हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिर से आप सभीको internet sikho में बहुत बहुत स्वागत है .दोस्तों हाम सभी जानते है की आज Eid ul zuha और यह हामारे देशो में मुस्लमान भाइयो के लिए यह दिन बहुत ही ख़ुशी का दिन है .और में दिल से हमारे मुसालमन भाइयो को ईद मुबारक देना चाहता हु .

सदा मुस्कुराते रहो जैसे हासते है  फूल 

दुनिया के सारे गम तुम्हे जाए भूल 

चारो तरफ  फेलाओ खुशियों का गीत 

यह दुआ  के   साथ यार तुम्हे  मुबारक  हो ईद 

दोस्तों आज में आपको बाताऊंगा की Eid ul zuha  क्या है और इसके मानाने का पीछे कान क्या है ?दोस्तों आप सभी जानते है   internet sikho  हामेशा हर एक तोहार का खुलासा करते आया है आपके  सामने और ठीक आज भी ऐसा हामारे मुसलमान भाइयो का   तोहार है Eid ul zuha जिसके बारे में आज में आपको बाताने वाला हु तोह दोस्तों पूरा पोस्ट को जरुर पढ़े .

Eid ul zuha क्या है और लोग Eid ul zuha क्यों मानाते है?

दोस्तों हर एक धर्मो और सास्त्र में भगबान का दर्शन पाना सबसे बड़ा पुन्य का काम माना जाता है.हिन्दू धर्मो में जैसे हमसब पूजा का समय हाथ जोड़ते है भगबान के सामने ठीक उसी तरह से मुस्लिम धर्मो में क़ुरबानी का मतलब होता है की खुद को खुदा के नाम पार कुर्बान कर देना यानि की अपनी सबसे पसंदिता चीज़ को तेग करना.और इसी भाबनाओ को उजागर करना मुस्लिम धर्मो का तोहार Eid ul zuha है जिससे हाम बकरी ईद के नाम से भी  जानते है.और Eid ul zuha मुस्लिम कैलंडर में  महत्त्य्पुर्नो तोहार में से एक है.

और आपको बाता दू की इस तोहार के मानाने के पीछे एक काहानी भी जुड़े हुए है जोह की आपको   में बाताने वाला हु.काहानी यह है की हजरत इब्राहिम द्वारा आल्ल्हा के हुकुम पार आपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो जाने के याद में यह तोहार मानाया जाता है.और हजरत इब्राहिम को पेगेम्बर के रूप में जाना जाता है जोह आल्हा के सबसे करीब है माना जाता है .और उन्होंने तेग और कुर्बानी का जोह उदाहरण दुनिया के सामने दिखाया वोह आभी भी अदितियो रह गया है .

 

और आपको बात दू की इस्लाम धर्मो के मुताबिक आल्ल्हा हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेना चाहते थे इसीलिए उन्होंने उनके सबसे पयारी चीज़ को कुर्बानी देने के लिए काहा गया था .और तभी हजरत इब्राहिम को लागा की उनके सबसे प्यारी तोह उनके बेटा है और इसीलिए उन्होंने आपने बेटे की ही बलिदान देने के लिए बोला .और फिर हजरत इब्राहिम को लागा की कुर्बानी देने समय उनका जोह भाबना है थोडा दृष्टीहिन् हो सकता है इसके लिए उन्होंने आपने आँखों पर काला पट्टी बांध लिया था .और फिर जब क़ुरबानी पूरा हुआ तब उन्होंने पट्टी हटाई तोह उन्होंने आपने बेटा को आपने सामने जिन्दा खड़ा हुआ देखा .और बेदी पार काटा हुआ मेमना पड़ा था.तभी से इस मौके पर बकरे और मेमना की बलिदान प्रथा शुरू हुआ है .और कुछ कुछ jaiga पे लोग उटो की भी बलि देते है .

 

आज के दिन में Eid ul zuha में कुर्बानी कैसे दिया जाता है?

दोस्तों इस Eid ul zuha के समय पार आनंदपुर्नो उत्सब और संतुलित धार्मिक अनुष्ठान किये जाते है .माना जाता है की इस परीक्षाको सम्मान करते हुए  दुनिया भर के सारे मुस्लमान भाइयो इस अबसर पार आल्ल्हा में आपनी आस्था दिखाने    के लिए जानवरों को कुर्बानी देते है.और कुर्बानी में ककरो का  ही कुर्बानी दिया जाता है.और बकरा सास्थ्यावान और    बगरे किसी खुत का होना चाहिए.यानि उसके बदन के सारे हिस्से वैसे ही  होना चाहिए जैसे खुदा ने बानाए है .और आल्हा के नाम लेकर ही जानवर को कुर्बानी दिया जाता है.और इसी क़ुरबानी को हलाल काहा जाता है.और इस मांस को 3 हिस्से में भाग  किया जाता है एक हिस्सा खुद के लिए एक हिस्से दोस्तों   और रिश्तेदार के लिए और एक हिस्से गरीबो के लिए राखा जाता है . दोस्तों आपको बाता दू की जिस तरह ईद उल फितर में गरीबो में पैसा दान किया जाता है ठीक उसी तरह बकरी ईद में गरीबो को मांस बता जाता है .और यह इस्लाम की सबसे बड़ा खासियत यह है की उनके किसी भी परबो में समाज के  कमजोर और गरीब लोगो को कभी अबहेला नहीं करते वल्कि उनके मदत करना ही उसका धरम मानते है.और यह परबो जाहा सबके साथ लेकर चलने का सिख देता है वोही बकरी ईद यह भी एक सच्चाई की राह  में आपना सबछ कुर्बान करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

तोह दोस्तों मुझे उम्मीद है की Eid ul zuha क्या है  और Eid ul zuha क्यों मानाया जाता है इसके सम्बंधित जोह भी सावाल है आपको इस पोस्ट में समझा पाया हु . इस जानकारी से जुड़े हुए आपके मन में कोई भी साबाल है तोह आप मुझे जरुर पूछ सकते है.और इस पोस्ट को आपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना ना भूले.और ऐसे ही हरदिन एक नए पोस्ट आपके मेल box में पाने के लिए internet sikho को subscribe करना न भूले.

 

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