हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिरसे आप सभीको internetsikho में बहुत बहुत स्वागत है.दोस्तों आज में आपलोगों के साथ एक बहुत ही बड़ा कंपनी के सफलता के काहानी के बारे में बातानेवाला हु.और इस सफलता के काहानी से हामे यह सिख मिलेगा की एक इंसान के सफलता पाने के उससे क्या क्या ही ना करना पड़ता है.और आपने इससे पहले OLA CABS के बारे में तोह सुने ही होंगे.और में आज इस OLA CABS के   सफलता के राज के बारे में बाताने जा राहा  और साथ में यह इ जानेंगे की OLA CABS के जोह फाउंडर है भविष अग्गार्वल जिसने यह कंपनी को खाडा किया है उसके बारे में भी थोडा बात करेंगे.

OLA CABS की सफलता की काहानी हिंदी में  

एक दिन की बात है जब भविष ने आपने पिता से ट्रेवल एजेंट busniess के बारे में डिस्कस किया था.फिर भविष आग्गार्वल के पिता भविष से पूछा क्या तू ट्रेवल एजेंट बनना चाहता है?फिर 2008 में भविष ने iit bombay से आपनी ग्रेजुएशन पूरी किया और फिर माइक्रोसॉफ्ट में प्लेसमेंट लेते हुए उसने उनकी रिसर्च टीम के साथ काम करना शुरू कर दिया.2 साल माइक्रोसॉफ्ट के साथ काम करके उसने उस job से रिजाइन दे दिया.क्यों की काफी सोच समझने के बाद भविष इस नतीजे पार पंहुचा की job तोह फिर से भी कर लेगा but अभी अगर उसने हिम्मत नहीं जुटाएंगे तोह सायेद उससे ज़िन्दगी भर आपना स्टार्टअप नहीं शुरू कर पायेगा.इस sitution  में मुझे tvs पिक्चर के वोह फेमस डायलॉग याद आता है की इस देश के ग्रेजुएट्स अजब आपनी 9-5 job करने लागते है ना तब बाहार निकलते समय उन्हें सिर्फ 3 रास्ते ही होते है nba/ias/startup और जब job छोरकर भविष ने फिर एक वेबसाइट स्टार्टअप किया जोह की olatrip.com के नाम पे.और उसने काफी रिसर्च के बाद कुछ आछे वीकेंड breaks,and शोर्ट durition holidays के लिस्ट बानाए और आपने वेबसाइट पार लिस्ट करदिया.

ऐसे तोह भविष के पिता को भविष के busniess से कोई दिक्कत नहीं था बास उस्न्हे सिर्फ यह चिंता था की कोई इनसब चक्कर में उनके बेटे भी ट्रेवल एजेंट ना बनके ना रह  जाये.इसीलिए उन्होंने उसको suggest किया की बेटा तुम्हारा job experiance आछा है अब भी अगर तुम किसी आछी जगह से आपना mba करके एक solid trackrecord बाना लेते हो तोह बाद में तुम करते रहना यह busniess के बारे में आभी तुमको कुछ पाता ही नही .उसके पिता कही ना कही सही भी थे के आखिर उससे इस busniess का ज्ञान कितना था.लेकिन भविष की गुट अनुभव ने उसको और एक्स्प्लोर करने को काहा.

OLA CABS success story

जब olatrip साईट पार उससे कोई response नहीं मिला तोह वोह फिर 2010 में हो राहा था कॉमन वेल्थ गेम्स के स्टेडियम के बाहार पहुच के लोगो के बिच कुछ pemplates बाटने लागे.की सायेद वोही से उससे कुछ clints मिल जाए.लेकिन सुभे से शाम हो गया और वोह किसी एक लोगो को भी आपना पैकेज बिक नहीं पाया था.फिर एकदिन क्या हुआ जब भविष ने बंगलोरे से बन्दीपुर जाने के लिए कार रेंट किया था तोह वोह कार वाले ने आधे रस्ते में जाकर ही कार रोकी और उससे पैसे का हिसाब किताब करने लागा.जब भविष ने उससे कुछ भी एक्स्ट्रा पैसा देंने से इनकार कर दिया तोह वोह उससे बिच रस्ते में ही उतर के खुद चलकर निकल गए.पुरे दिन भविष बस येही सोचता राहा की भारत में आपना जान पहचान के किसी को भी एक जरुरी कार service मिलना कितना मुश्किल काम है.कुछ समय बाद जब वोह किसी एक clint को हॉलिडे पैकेज बेचने में लागा हुआ था तोह उस clint ने छूटते ही भविष को बोला नैनिता जाना है अगर गाड़ी है तोह दिलवा दीजिये.यह सुनकर उससे और जादा realize हुआ की लोगो को ekctualy कही पार भी जाने के लिए उसकी या olatrip की जरुरत नहीं है.अगर जरुरत है तोह बास एक गाड़ी की.इस incedent के बाद भविष मुंबई चला आया और यहा उसने अपनी दोस्तों अंकित bhati के साथ मिलकर एक नयी website लांच किया olacabs.com के नाम पार.और 2010 में वोह finnaly आपनी वेबसाइट की थ्रू कार भाड़े पार देने में कामियाब राहा.

OLA CABS के फाउंडर भाबिश अग्गार्वल की सफलता की काहानी 

online cabs provide करनेसे 7/8 महीने में ही बाजार में यह खबर फेल गया की OLA CABS करके कोई नया स्टार्टअप आया है जोह की लोगो को लिए एक real life के प्रॉब्लम sloved करने में लागे है .आज भी भारत में हर कोई आसानी से कार एफोर्ड नहीं कर पाते है और जोह अफोर्ड कर भी राहा था उनके लिए पार्किंग और फ्यूल के दाम जैसे चीजे एक डेली स्ट्रक्चर बन चूका है.2012 के मिड में जब OLA CABS ने आपना mobile apps लांच किया तोह लोगो के बिच उसका रिवॉर्ड of mouth फैलते ही इन्वेस्टर्स को एक जबरदस्त oppourtunity  नजर आने लागा.snapdeal  फाउंडर कुनाल भेल ओला के एंजेल investors बने और फिर saadhi.com के फाउंडर अनुपम मित्तल ने भी इसमें इन्वेस्टमेंट किया.और 2012 के अंत तक ओला की र मार्किट में बड़े बड़े investors   से एक organaised रास्ते से फंडिंग मिलना शुरू हो गया था.OLA CABS की शुरुवात के समय पार भविष को सही तरह के driver और cars धुंडने के लिए बहुत jaige पे भटकना पड़ता था.कभी कभी ड्राईवर नहीं रहता था तोह वोह खुद     ही उससे pickup करता था.एक छोटे से कमरे में शुरू करे हुए स्टार्टअप को आज पुरे भारत में एक exicute   करना आपने आप में ही बहुत बड़ा chalange   बन गया था.भविष ने आज के समय में इतना सफलता अर्जन करने के बाद   भी आपने लिए कोई पर्सनल कार भी नहीं राखा है.वोह खुद हरदिन 3/4 बार OLA CABS से जातायत करता है और आपनी राइडर्स फीडबैक आगे forward करते रहता है.

तोह दोस्तों यह था OLA CABS  के निर्माता भविष आगरवाल  के सफलता की काहानी.में उम्मीद करता हु की आपको यह काहानी पसंद आया होगा.तोह इस काहानी या पोस्ट से जुड़े हुए आपके मन में कोई भी सावाल या सुझाब है तोह आप जरुर कमेंट box का उपोयोग  करके हमारे साथ शेयर करे .

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