भारतीयों महिलाओ को नारिएल तोडना माना क्यों है?

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हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिर से आप सभीको internet sikho में बहुत बहुत स्वागत है.दोस्तों भारत में हम सभी जानते है की हिन्दू धर्मो में नारिएल को एक बहुत ही पबित्र बस्तु मानते है.और इसीलिए हर कोई सुभ कार्य में नारियेल का   इस्तेमाल किया जाता है.और आपको एक बात बाता दू की नारियेल में जोह हामे 3 बिंदु नजर आता है वोह 3 बिन्दुओ को शिब के त्रिनेत्र के रूप में माना जाता है.

हिन्दू धर्मो में कोन कोनसा सुभ कार्य में नारियेल फोड़ा जाता है?

दोस्तों आप देखते ही होंगे की हिन्दू धर्मो में रक्षाबंधन से लेकर सुभ बिबाह से लेकर , गृहों प्रबेश तक लेकर busniess के शुरुवाती तक नारिएल का इस्तेमाल किया जाता है.   लेकिन इसमें सोचने वाले बात यह है की   यह नारिएल फोड़ने का काम महिलायों द्वारा क्यों नहीं करवाया जाता है?जी हा इसके पीछे कुच्छ अंजाने बाते है जोह की में इस पोस्ट में आपके साथ शेयर करने वाला हु.

कोई भी सुभ काम में महिलायों क्यों नारिएल नहीं फोड़ता?

दोस्तों इसके पीछे कुछ कारन छुपा हुआ है.जैसे परंपरागत रूप में देखा जाए तोह नारिएल को एक नयी सृष्टी का बिज के रूप में माना जाता है.और नारिएल को बिज के स्वरुप मान्य किया गया है और उसके उत्पादन से जोडकर देखा गया है.और महिलायों संतान उत्पत्ति के एक कारक होता है इसी वजह से महिलायों के लिए नारियेल फोड़ना एक बर्जिन काम माना जाता है इसीलिए भारतीयों महिलायों को नारियेल फोड़ने से माना है.पार कोई भी परामानिक रूप से कोई भी धार्मिक ग्रंथो में यह नहीं लिखा हुआ है ,और ना ही कोई देब देबता ने ऐसा कोई आदेश दिया है.पार बर्तमान जीबन के ताल मिल के साथ चलते हुए हिन्दू धर्मो में महिलायों नारिएल नही फोड़ते है.

भारतीयों महिलाओ   को नारिएल तोडना माना क्यों है?
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हिन्दू धर्मो में महिला  को नारिएल फोड़ने का माना कबसे और कैसे मान्य हुआ था?

इसकी कथा ब्रम्भारिशी बिश्वमित्र द्वारा किया गाया नया सृष्टि के सृजन करने से जुड़े हुए है.और तभी उन्होंने सबसे पहले रचना के रूप में नारियेल का निर्माण किया ,और यह मानब का ही एक प्रतिरूप माना गया है.और इसलिए देबी देब्ताओ के श्रीफल चढाने के बाद पुरुष ही इससे फोड़ते है.

नारियेल में ऐसा क्या रहता है जिससे महिला को फोड़ने से माना है?

नारियेल जोह है वोह देबी देबताओ के स्थापन करते समय इस्तेमाल किया जाता है इसीलिए इससे श्रीफल भी काहा जाता है.पौराणिक काहानी के अनुसार माना जाता है की जब भगबान बिष्णु धरती पार अबतार लिया था तब उस समय वोह आपने साथ  में 3 बस्तु लाया था 1)लक्ष्मी 2)नारियेल का झाड 3)कामधेनु .और इसीलिए नारिएल के ब्रिक्ष को कल्पोब्रिक्ष्हो भी काहा जाता है.और नारियेल में ब्रम्भा ,बिष्णु महेश्वार इन् 3नो देब्ताओ का बास रहता है ऐसा माना जाता है.और नारियेल से निकले हुए पानी से भगबान की मूर्तियों को पोछा भी जाता है.

तोह दोस्तों यह था आजका टॉपिक .और इस टॉपिक को पढकर आप यह जान पाए है की क्यों महिलायों ने नारियेल नही फोड़ते है.और मुझे उम्मीद है की यह जानकारी आपको पसंद आया होगा.और इस जानकारी को आप आपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना ना भूले ताकि उनको भी यह सावाल का जवाब मिल सके.और इसी तरह हर दिन एक नए जानकरी आपके मेल बॉक्स में पाने के लिए internet sikho को subscribe करना ना भूले.

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