हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिरसे आप सभीको internet sikho में बहुत बहुत स्वागत है.दोस्तों आज इस पोस्ट के माध्यम से आप सभीको एक ऐसा काहानी बाताने जा राहा हु जिससे हमें यह सिख मिलेगा की हमारे imandari ही हमारे लिए सबसे बड़ा धन है.तोह चलिए फिर काहानी पे चलते है अब.

हामारे imandari ही हमारे धन

एक गाँव में हीरालाल नाम के एक बेकती था जोह की सबसे बड़े चोरो में से एक चोर था.हीरालाल जी हरदिन जेब में चाकू डालकर लोगो के घर में चोरी करने जाता था.हीरालाल जी पैसे से तोह चोर था लेकिन जैसे हर इंसान चाहता है की उसके बेटे आछे स्कूल में पढाई करे उनका भी येही सोच था .तोह उन्होंने आपने  बेटे का admision एक आछे public स्कूल में करा दिया था.

हीरालाल जी का बीटा पढाई में बहुत ध्यान था लेकिन पेसे के अभाब में 12 class के बाद नहीं पढ़ पाया.अब कोई जगह नौकरी के लिए भी अप्लाई किया लेकिन कोई उससे नौकरी पार भी नहीं राखता था.एक तोह चोर का बेटा है ऊपर से 12बी पास तोह कोई नौकरी पार नहीं राखता था.अब बेचारे बेरोजगारी की तरह ही दिन रात घर पार ही पढ़ा रहता था.हीरालाल जी को बेटे की चिंता हुयी तोह सोचा की क्यों न इससे भी आपने काम सिखाकर आपने साथ शामिल करले.जैसे मेने चोरी कर करके आपना गुजारा किया वैसे यह भी कर सकता है.

येही सोचकर हीरालाल जी एकदिन आपने बेटे को आपने साथ लेकर गया.रात का समय था बाप बेटे दोनों चुपके चुपके एक ईमारत में पहुचे.ईमारत में कोई कामरे थे सभी कामरे में रौशनी थी देखकर लाग राहा था कि किसी आमिर इंसान इ हाबेली है.हीरालाल जी आपने बेटे को बोला आज हाम इस हाबेली में चोरी करंगे,मैंने यहाँ पहले भी कोई बार चोरी की है और बहुत माल भी मिलता है यहा से.लेकिन बेटा लागातार हाबेली की आगे लागी लाइट को ही देखते रहा था .फिर हीरालाल जी बोला अब देर ना करो जल्दी अन्दर चलो नहीं तोह कोई देख लेगा.लेकी उसके बेटे आभी भी हाबेली की रौशनी को ही देख राहा था और वोह धीर आवाज में बोला पिताजी में चोरी नहीं कर सकता हु.

हीरालाल जी बोले की तेरा दिमाग खाराप है क्या चल जल्दी अंदर .फिर बेटा बोला पिताजी,जिसे यहासे हामने कोई बार चोरी की है देखिये आज भी उसकी हाबेली में रौशनी है और हामारे घर में आज भी अन्धकार है.महनत और इमानदारी की कामाई से उनका घर आज भी रोशन है और हामारे घर में पहले भी अन्धकार था और आज भी अन्धकार ही है.

में भी ईमानदारी और महनत से कामाई करूँगा और उस कामाई के पैसे से ख़रीदे हुए  दीपक से मेरे घर में भी रौशनी होंगे.मुझे यह जिबन में अन्धकार भर देने वाला काम नहीं करना है.यह सुनते हुए हीरालाल जी के आँखों से  आंसू निकल आये.उसके बेटे की पढाई आज सार्थक होती हुयी दिख राहा था.तोह दोस्तों बेईमानी और चोरो से इंसान धन भरके सुखी तोह रह सकते है लेकिन उसके जीबन में हामेशा के लिए पाप और अन्धकार का बोझ भर जाता है.

हामेशा आपने काम को महनत और इमानदारी से करे.बेईमानी के कामाई से बने पालवन भी इमानदारी की सुखी रोटी आगे फेके थे.कुछ ऐसा काम करे की आप समाज में सर उठाकर चल सके.दोस्तों  उम्मीद करता हु imandari से जुड़े हुए यह काहानी से आपको बहुत कुछ सिखने मिला होगा जोह की हामारे जीबन में जुड़ हुए है.तोह इस काहानी आपको कैसा लागा आप जरुर निचे कमेंट box का प्रयोग  करके आपना राइ दे.

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