गनपति बाप्पा से जुड़े हुए पूरी काहानी

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हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिर से आप सभीको internet sikho में बहुत बहुत स्वागत है.दोस्तों सावन महीने ख़तम होने के  बाद ही शुरू हो जाता   है  गनपति बाप्पा जी का पूजा जोह की महाराष्ट्रियन लोगो के लिए यह सबसे बड़ा तिवार है और इसलिए महाराष्ट्र में बहुत धूम धाम से गनपति बाप्पा जी का पूजा करते    है .और आप यह भी जानते होंगे की    जितने भी देवी देवता है उनमे से सबसे पहले जोह है वोह गनपति बाप्पा जी का ही पूजन किया जाता है उसके बाद ही बाकी सारे देवी देवोता का पूजा होता .और ऐसा क्यों है और इसके पीछे क्या काहानी छुपा है आज में आपको बाताऊंगा और साथ में गनपति बाप्पा जिन्हें हाम विनायक जी के नाम से भी जानते है और आज में आपको   उनसे जुड़े हुए सारे काहानी इस पोस्ट के बारे में बाताऊंगा .तोह कृपया करके इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े .

मेरी और से गणेश चतुर्थी की हार्दिक सुभोकामोनाये ,आप सपरिबार धनो धान्न्यो से सम्पन्नो और प्रसोंनो रहे ,श्री गणेश जी आपके घर रिद्धि सिद्धि सहित सदा सहाय रहे.

गनपति जी से जुड़े हुए कुछ बाते

दोस्तों गनपति बाप्पा से जुड़े हुए एक बहुत ही बढ़िया काहानी है जोह की इस पोस्ट में बाताया गया है .दोस्तों एक गाव में एक ब्राम्भन और उसके पत्नी रहा करता था .और जोह ब्राम्भन था वोह बड़े ही गनपति बाप्पा का भक्त था.और इसीलिए उन्होंने आपने घर में ही एक छोटा सा  गणेश जी का मंदिर बानाया था,और उस मंदिर में गनपति बाप्पा का मूर्ति भी स्थापन किया था.और वोह प्रतिदिन सुभे सुभे नहाकर उनक पूजा भी करता था ,और पूजते समय वोह गणेश चल्लिसा का भी पाठ किया करता था.और आरती के समय ब्राम्भन जब घंटी बाजाया करते थे तोह उस वक्त ब्राम्भन के पत्नी को अन्दर से बहुत परिशानी होता था घंटी के आवाज सुनकर .

 

और उनेक पत्नी ने एकदिन सोचा की इस परिशानी से कैसे मुक्त हो सके उसके लिए एकदिन उन्होंने गनपति बाप्पा जी के मूर्ति को एक कोने में छुपा दिया और सोचा की देखते है अब ब्राम्भन कैसे पूजा करते है?और कुछ ही समय के बाद जब ब्राम्भन जब नाहाकर मंदिर के तरफ आया और जब देखा की मंदिर में गनपति बाप्पा जी का मूर्ति नहीं है तब वोह क्रोधित होकर आपनी पत्नी से पूछने लगा की मूर्ति काहा है ?लेकिन पत्नी ने उस समय कुछ नहीं बोला ,और ऐसे में ही गनपति बाप्पा जी को बहुत जोर से हासी आगयी .और जब ब्राम्भन और उसके पत्नी कापड़ा हाताकर गणेश जी को देखा की वोह गणेश जी का मूर्ति बहुत जोर जोर से हस रहा है .

फिर ब्राम्भन और उसके पत्नी गनपति बाप्पा जी को हासते हुए देखकर बहुत ही अस्चार्ज्योजनक हो गया और उनके पत्नी बार बार गणेश जी को देखते हुए प्रणाम करने लागा और उनके गलती के लिए बार बार माफ़ी मांगने लागा.फिर सिद्धि के दाता गनपति महाराज बोले की में तेरी भक्ति से प्रसन्नो हु.और यह कहकर ब्राम्भन के घर को धन और हीरे ,मोती में  भर दिया.और पुत्र पुत्री के सुख शांति का बरदान देकर अंतर्धान हो गया.और फिर ब्राम्भन ने उसी धन से एक बहुत बड़ा भबन और गणेश जी के मनदिर के पास ही उनके पिता शंकर जी के मंदिर बनवाया.

 

फिर 9 महीने के बाद ब्राम्भन के एक पुत्र हुआ और उसके परिबार में 3 लोग हो गया और उनलोगों ने सुख शांति के साथ अपना जीबन बिताने लगे है .और भगबान के कृपा में उनके चरणों में आपना जीबन बिताने लागे है.फिर ब्राम्भन के पत्नी गनपति बाप्पा जी से बोले की हामारे भक्ति से भी प्रसन्नो होइए और हामे भी आपका साक्षात दर्शन दीजिये .

गनपति  बाप्पा से जुड़े हुए पूरी काहानी
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गनपति बाप्पा जी के पूजन के नियम

हामारे भक्ति से भी प्रसन्नो होइए और हामे भी आपका साक्षात दर्शन दीजिये .इस ब्रत को करने से पहले गणेश जी को पुष्प माला ,धुप ,दिया में कपूर या घी जलाकर आरती करे.ठीक ऐसे ही संध्या होने पार चन्द्रमा का पूजा करके आरती कर और प्रणाम करे .गणेश जी को 3 अर्ध दे और एक अर्धो निशि यानि की चौथा के नाम दे .ऐसे 5 प्रकार अर्ध देकर किसी ब्राम्भन को सेवा कराये और आप संग भोजन करे और उस दिन तेलयुक्त भोजन  ना करे .सासत्र के अनुसार 4 साल या 13 साल के लिए यहे ब्रत करने का उज्जापन करना चाहिए .और गनपति जी का पूजन बिधिपुर्बक और नियम अनुसार करना चाहिए.और आपने खमता अनुसार दान करे और ब्राम्भन भोजन कराये,और सुहागिन स्त्रियों को भी भोजन कराये.

दोस्तों गनपति बाप्पा जी के यह काहानी पौराणिक काहानी को संग्रह करके इस पोस्ट को लिखा गया है और मुझे उम्मीद है की आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा .और गनपति बाप्पा से जुड़े हुए आपके पास कोई काहानी है तोह आप मुझे कमेंट करके शेयर करे .और इस पोस्ट को आपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना ना भूले .और ऐसे ही हर दिन एक नए नए जानकारी आपके मेल बॉक्स में पाने के लिए internet sikho  को subscribe करना ना भूले.

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