GHAMAND MAT KARIYE CHAHE AAP JOH BHI HAI

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हेल्लो दोस्तों आज एकबार फिरसे आप सभीको internet sikho में बहुत बहुत स्वागत है.आज आज हम इस पोस्ट के माध्यम से एक ऐसा टॉपिक शेयर करने जा राहा हु जोह की कड़वा सच है और बहुत interesting भी है.तोह उम्मीद करता हु की इस टॉपिक को पढने के बाद आपको थोडा बहुत इस टॉपिक का मूल बिषय समझ में आयेगा.तोह चलिए शुरू करते है आजके काहानी.

हमें  कभी भी ghamnad नहीं करना चाहिए 

दोस्तों कभी खुदपर ghamand और गुरुर नहीं करना चाहिए.चाहे आप जोह भी हो सफल या असफल.गरीब या आमीर कभी खुदके उपर घमंड मत करिए और दुसरे को किसीसे छोटा मत समझिये.इंग्लिश में एक काहावत है “THERE IS ALWAYS SOMEONE BIGGER” .इसका मतलब यह है की आपसे भी कोई बड़ा है ,तोह कभी खुदको उचा मत मानिये क्यों की आपसे भी जादा उचे लोग इस दुनिया में मजूद है.

और में यह बात आपलोगों को अच्छा से समझाने के लिए एक स्टोरी शेयर करने जा राहा हु जिससे आपको और भी आछे से समझ आये की हामे कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए.और यह स्टोरी बॉलीवुड की एक जाने माने कालाकार दिलीप कुमार जी के जीबन में घटे हुए एक सच्चे घटना है जोह की दिलीप कुमार जी ने ट्विटर पार twitt करके लोगो को बाताया.यह काहानी तब का है जब उन्होंने आपने कैरिएर बानानेका रास्ते में चल राहा था.उस समय लोगो में से एक बहुत ही आछा पहचान हुआ था और बॉलीवुड के एक प्रसिद्धो एक्टर के रूप में माना जाता था.

एकबार वोह हवाई जाहाज में कोई जा राहा था.और उनके बगल में बैठा हुआ एक बेकती थोडा बुजुर्ग था वोह देखकर मालूम पढ़ राहा था.उसने सादा सिंपल pant शर्ट पहना था उर सामान्य परिबार के बेकती ऐसा देखकर लाग राहा था.और वोहा बैठे सारे लोगो की नजर दिलीप कुमार जी पे था.लेकिन उनके बगल वाला आदमी उनसे देख भी नहीं राहा था.वोह आराम से आखबर पढ़ राहा था और बार बार खिड़की से बाहार देख राहा था.फिर जब चाय पीने के समय हुआ तोह उसने चाय भी बहुत जल्द ही पि ली.यह देखकर दिलीप जी को बड़ा आच्र्ज्य हुआ और सोचा की यह बेकती मेरे तरफ देख भी नहीं राहा है.और फिर थोडा समय बाद दिलीप जी ने उस बेकती के तरफ देखकर थोडा हासा,फॉर वोह बेकती भी हासा,फिर ऐसे ही धीरे धीरे से बात चित शुरू हुयी.

 

फिर दिलीप जी ने उस बेकती से पूछा क्या आप फिल्म देखते हो ?                                                              उसके जवाब में उस बेकती ने बोला हां कभी कभी,बहुत सालो पहले देखि थी फिल्म.                                       दिलीप जी ने फिर उनको बाताया की में फिल्मो में ही काम करता हु.                                                         फिर वोह बेकती बोला वोह बहुत आछा.फिर बेकती ने पूछा की आप फिल्मो में क्या काम करते हो?दिलीप जी ने जवाब में बाताया की में एक्टर हु.फिर उस बेकती ने काहा की वोहा क्या बात है?लेकिन दिलिप जि ने आभितक नाम भी नहीं बाताया,लेकिन वोह बेकती अभी भी दुसरे लोगो के तरह दिलीप जी को नहीं देख राहा था.फिर जब यात्रा समाप्त हुआ तब दिलिप जी ने उस बेकती को आपने बारे में बाताने के उद्द्येस्श्यो से हाथ मिलाया और काहा my name is dilip kumar .उस बेकती ने हासते हुए दिलीप कुमार जी से हाथ मिलाया और बोला धन्यबाद i am j.r.d tata .

यह सुनते ही दिलीप कुमार जी सोचते ही रह गया,उस दिन उनको यह एहसास हुआ की में कितने भी बड़ा हु,कोई फर्क नहीं पढता है.मुझसे भी बड़े लोग इस दुनिया में शामिल है.इस घटना के बाद दिलीप कुमार जी हमेशा एक ही बात याद राख्नने को काहा की किसीको छोटा मत समझिये,और हामेशा बिनम्र बने रहे.

उमीद करता हु की  दिलीप जी के  यह सच्च्चाई काहानी से हामे बहुत कुछ सिखने को मिला है.आपको इस काहानी कैसा लागा आप भी निचे कोमेंट सेक्शन में आपने साथ शेयर करने ना भूले.

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